Sunday, August 16, 2026

अभिजीत दीपके ने शुरू की ‘स्कूल ठीक करो’ मुहिम, निजी स्कूलों की फीस तय करने की मांग

Share

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले से ‘स्कूल ठीक करो’ मुहिम शुरू की। उन्होंने सरकारी स्कूलों में पानी, बेंच और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी का आरोप लगाते हुए निजी स्कूलों की फीस पर सीमा लगाने की मांग की।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शनिवार, 15 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी से ‘स्कूल ठीक करो’ मुहिम की शुरुआत की।

दीपके ने सरकारी उपेक्षा के कारण गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित होने का आरोप लगाया। उन्होंने सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और निजी स्कूलों की फीस की सीमा निर्धारित करने की मांग की।

जिला परिषद स्कूल में पानी नहीं होने का दावा

स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद दीपके ने संतुक पिंपरी स्थित जिला परिषद स्कूल का निरीक्षण किया। उन्होंने दावा किया कि स्कूल के शौचालयों में पानी उपलब्ध नहीं था।

दीपके ने पत्रकारों से कहा, “अगर आजादी के 80 वर्ष बाद भी सरकारी स्कूलों में पानी जैसी बुनियादी सुविधा नहीं है, तो देश कैसे आगे बढ़ेगा?”

उन्होंने स्कूल की खिड़कियां टूटी होने और विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त बेंच उपलब्ध नहीं होने का भी आरोप लगाया। उनके मुताबिक, स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले बैठने की व्यवस्था बहुत कम थी।

स्कूलों के निरीक्षण के लिए तैयार होगी चेकलिस्ट

दीपके ने बताया कि CJP ने सरकारी स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं का आकलन करने के लिए एक चेकलिस्ट तैयार की है। इसमें पानी, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, खिड़कियां, सड़क और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता दर्ज की जाएगी।

उन्होंने कहा कि मुहिम के अगले चरण में उनकी टीम महाराष्ट्र के विभिन्न तालुकों में सरकारी स्कूलों का दौरा करेगी। स्कूलों से एकत्र किए गए आंकड़ों को बाद में संकलित कर सार्वजनिक किया जाएगा।

दीपके ने केंद्र सरकार पर शिक्षा बजट कम करने का आरोप भी लगाया, लेकिन उन्होंने अपने बयान में इस दावे के समर्थन में किसी आधिकारिक आंकड़े या दस्तावेज का उल्लेख नहीं किया।

सरकारी स्कूल बंद करने पर उठाए सवाल

CJP संस्थापक ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों के दौरान देश में 94,000 से अधिक सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

उन्होंने सवाल किया, “जब देश को अधिक स्कूलों की आवश्यकता है, तब स्कूलों को बंद करके राष्ट्र को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है?”

दीपके ने सरकार पर निजी स्कूलों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी स्कूलों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और पर्याप्त सुविधाएं मिलेंगी, तो अभिभावकों को निजी स्कूलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

विद्यार्थियों के लिए समान अवसर की मांग

दीपके ने कहा कि देश की प्रगति का दावा तब तक पूरा नहीं हो सकता, जब तक सभी विद्यार्थियों को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध न हों।

उन्होंने उन वीडियो का भी उल्लेख किया जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी अपने स्कूलों तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़कें और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की शिकायत करते दिखाई देते हैं।

हाल में दीपके ने शिक्षकों की कमी को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का एक वीडियो भी साझा किया था। उस घटनाक्रम की जानकारी Mint की रिपोर्ट में उपलब्ध है।

निजी स्कूलों की फीस पर सीमा लगाने की मांग

दीपके ने निजी स्कूलों की बढ़ती फीस पर चिंता जताते हुए कहा कि कई परिवार सालाना एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक फीस चुका रहे हैं।

उन्होंने कहा, “गरीब बच्चों को शिक्षा कैसे मिलेगी? निजी स्कूलों की फीस की सीमा तय की जानी चाहिए।”

हालांकि, निजी स्कूलों की फीस के नियमन की व्यवस्था राज्यों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। किसी भी सीमा को लागू करने के लिए संबंधित कानूनों, स्कूलों की श्रेणियों और राज्य सरकार की नियामक शक्तियों को ध्यान में रखना होगा।

सार्वजनिक अस्पतालों की स्थिति भी उठाएगी CJP

दीपके ने कहा कि ‘स्कूल ठीक करो’ मुहिम के साथ CJP सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी ध्यान देगी।

उन्होंने दावा किया कि सरकारी अस्पतालों में कई मरीजों को फर्श पर सोना पड़ता है, सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना होता है और सीटी स्कैन जैसी जांच के लिए भी कई दिनों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

दीपके के अनुसार, उनकी टीम अस्पतालों का दौरा कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और मरीजों की समस्याओं को सामने लाएगी।

ग्रामीण युवाओं से आगे आने की अपील

दीपके ने ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय होने तथा सरकार से सार्वजनिक धन के इस्तेमाल के बारे में सवाल पूछने की अपील की।

उन्होंने कहा कि देश की राजनीति केवल शहरों में रहने वाले लोगों द्वारा तय नहीं की जाएगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों से आगे आने वाले युवा भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

दीपके और CJP इससे पहले भी शिक्षा, रोजगार तथा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मुद्दे उठा चुके हैं। संगठन की शिक्षा संबंधी मांगों और गतिविधियों की पृष्ठभूमि Times of India की रिपोर्ट में पढ़ी जा सकती है।

राजनीतिक दलों पर भी साधा निशाना

अपने गांव रवाना होने से पहले दीपके ने राजनीतिक दलों पर सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं करने का आरोप लगाया।

उन्होंने 14 अगस्त को छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित तिरंगा रैली से पहले लगाए गए बड़े बैनरों के खर्च पर भी सवाल उठाया। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति बताई गई थी।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

‘स्कूल ठीक करो’ मुहिम में लगाए गए आरोपों पर संबंधित शिक्षा अधिकारियों या सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद रिपोर्ट को अद्यतन किया जाना चाहिए।

मुहिम का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि CJP अपने निरीक्षणों से जुटाए गए आंकड़ों को कितनी पारदर्शिता से प्रस्तुत करती है और संबंधित सरकारी विभाग उन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

मूल रिपोर्ट Hams Live News में प्रकाशित की गई थी।

विषय-सूची

और पढ़ें

स्थानीय समाचार