Monday, August 24, 2026

NEET पेपर लीक: सुप्रीम कोर्ट ने NTA को मजबूत बनाने और तकनीकी सुधारों पर दिया जोर

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सुप्रीम कोर्ट ने कथित NEET-UG 2026 पेपर लीक के बाद NTA को मजबूत बनाने और तकनीकी सुधार लागू करने की विस्तृत जानकारी मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को एक स्थायी, सुरक्षित और पेशेवर विशेषज्ञता से युक्त संस्था बनाने पर जोर दिया है। न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और दूसरी गड़बड़ियों को रोकने के लिए स्थायी कर्मचारी, सुरक्षित बुनियादी ढांचा और आधुनिक तकनीकी क्षमताएं आवश्यक हैं।

न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कथित NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र लीक से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियां कीं।

न्यायालय ने केंद्र सरकार को एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें के राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने में हुई प्रगति और नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स द्वारा प्रस्तावित तकनीकी सुधारों की जानकारी देनी होगी।

मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को एक मजबूत और स्थायी संस्था बनाया जाना चाहिए, ताकि वह विशेषज्ञता सुरक्षित रखते हुए राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाएं निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से करा सके। केंद्र को राधाकृष्णन और नंदन नीलेकणी समितियों की सिफारिशों पर उठाए गए कदम बताने का निर्देश दिया गया है।

NTA को संस्थागत स्वरूप देने पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी चिंता केवल एक परीक्षा के लिए अपनाए गए सुरक्षा प्रबंधों तक सीमित नहीं है। न्यायालय यह जानना चाहता है कि सरकार ऐसी स्थायी व्यवस्था कैसे विकसित करेगी, जो प्रत्येक परीक्षा चक्र से मिले अनुभव को सुरक्षित रखते हुए भविष्य की प्रक्रियाओं को बेहतर बना सके।

पीठ ने कहा कि अनुभवी अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद यदि उनके अनुभव और जानकारी को संरक्षित करने का कोई संस्थागत तंत्र नहीं हो, तो संगठन वह विशेषज्ञता खो देता है।

न्यायालय ने पर्याप्त प्रशिक्षित कर्मचारियों, सुरक्षित कार्यालयों, गोपनीय संचालन के लिए विशेष बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा तथा अनुसंधान और विकास सुविधाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।

उसने NTA में वरिष्ठ नियुक्तियों, सुरक्षित डेटा भंडारण, केंद्रीय नेटवर्क संचालन, स्थायी परीक्षा केंद्रों और विशेष प्रभागों के गठन की जानकारी भी मांगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी NEET-UG सहित उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और पात्रता से संबंधित कई राष्ट्रीय परीक्षाएं आयोजित करती है।

समितियों की सिफारिशों पर प्रगति मांगी

केंद्र सरकार को पूर्व इसरो अध्यक्ष के राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों पर उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी।

इस समिति का गठन NEET-UG 2024 विवाद के बाद परीक्षा सुरक्षा, डेटा संरक्षण और NTA की संरचना एवं कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए किया गया था। समिति ने महत्वपूर्ण परीक्षा प्रक्रियाओं के लिए बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम करने और NTA की आंतरिक क्षमता बढ़ाने की सिफारिश की थी। समिति की रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

सुप्रीम कोर्ट ने नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स की सिफारिशों की जानकारी भी मांगी है। न्यायालय के सामने रखी गई जानकारी के अनुसार, टास्क फोर्स सार्वजनिक परीक्षाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन और अन्य तकनीकों के संभावित इस्तेमाल की समीक्षा कर रही है।

हालांकि, न्यायालय ने संकेत दिया कि तकनीक को प्रशिक्षित कर्मचारियों, जवाबदेही और स्थायी बुनियादी ढांचे के विकल्प के बजाय व्यापक सुधार व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

केंद्र ने मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था बताई

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रश्नपत्र तैयार करने, छापने, पहुंचाने और परीक्षा केंद्रों पर वितरित करने के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।

केंद्र के अनुसार, पहले प्रश्नपत्रों के कई सेट तैयार किए जाते हैं। इनमें से इस्तेमाल किए जाने वाले सेट का चयन NTA के महानिदेशक करते हैं। चिन्हित प्रिंटिंग प्रेस सीसीटीवी और सुरक्षा निगरानी में काम करती हैं, जबकि गोपनीय सामग्री तक पहुंच सीमित रखी जाती है।

न्यायालय को बताया गया कि प्रश्नपत्रों को सीलबंद बक्सों में GPS से लैस वाहनों के जरिये भेजा जाता है और बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है। परीक्षा की सुबह अधिकृत अधिकारियों को इस्तेमाल किए जाने वाले प्रश्नपत्र के सेट की जानकारी दी जाती है।

केंद्र ने दावा किया कि मौजूदा प्रणाली में सुरक्षा के कई स्तर हैं, हालांकि कुछ चरणों में मानवीय हस्तक्षेप अब भी होता है।

कंप्यूटर आधारित NEET पर विचार जारी

कई याचिकाकर्ताओं ने NEET को मौजूदा पेन-पेपर प्रणाली से कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT में बदलने का अनुरोध किया है।

केंद्र पहले ही सुप्रीम कोर्ट को बता चुका है कि इस प्रस्ताव पर सक्रियता से विचार हो रहा है। हालांकि, अंतिम निर्णय नंदन नीलेकणी टास्क फोर्स की रिपोर्ट को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

कंप्यूटर आधारित परीक्षा से कागजी प्रश्नपत्रों की छपाई और परिवहन की आवश्यकता कम हो सकती है। लेकिन इसके लिए पूरे देश में सुरक्षित डिजिटल बुनियादी ढांचा और पर्याप्त संख्या में परीक्षा केंद्र उपलब्ध कराने होंगे।

साइबर सुरक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाओं की उपलब्धता, क्षेत्रीय भाषाओं का समर्थन, सर्वर क्षमता और अभ्यर्थियों के डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दों का भी समाधान करना होगा।

संबंधित घटनाक्रम Hams Live News की NEET कवरेज में पढ़े जा सकते हैं।

याचिकाओं में पुनर्गठन और जवाबदेही की मांग

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका में NTA को बदलने या उसका व्यापक पुनर्गठन करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने प्रश्नपत्रों की डिजिटल लॉकिंग, केंद्रवार परिणाम जारी करने और कंप्यूटर आधारित परीक्षा अपनाने सहित कई उपाय सुझाए हैं। याचिका की विस्तृत जानकारी Bar & Bench की मूल रिपोर्ट में उपलब्ध है।

यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट की एक अलग याचिका में बेहतर निगरानी और प्रत्यक्ष संसदीय जवाबदेही वाली वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा संस्था बनाने की मांग की गई है।

एक अन्य याचिका में भी NEET-UG को कंप्यूटर आधारित बनाने और NTA के स्थान पर स्वतंत्र परीक्षा प्राधिकरण गठित करने का अनुरोध किया गया है। ये मांगें अभी न्यायालय के विचाराधीन हैं। इन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी अंतिम निर्देश नहीं माना जाना चाहिए।

NEET सुधारों की पृष्ठभूमि

NEET-UG 2024 में सीमित क्षेत्रों तक प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया था। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय कहा था कि उपलब्ध साक्ष्य पूरी परीक्षा को प्रभावित करने वाली राष्ट्रव्यापी प्रणालीगत गड़बड़ी साबित नहीं करते। इसलिए सभी अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का आदेश नहीं दिया गया।

इसके बावजूद, न्यायालय ने अधिकारियों को परीक्षा प्रणाली की कमजोरियां दूर करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2024 के फैसले में NEET-UG की शुचिता से संबंधित निष्कर्ष और निर्देश दर्ज हैं।

NEET-UG 2026 से जुड़े नए आरोपों के बाद न्यायालय ने NTA की संरचना और परीक्षा सुरक्षा उपायों की दोबारा समीक्षा शुरू की। 29 मई 2026 के आदेश में केंद्र को यह बताने का निर्देश दिया गया था कि अलग-अलग परीक्षा चक्रों से मिली सीख को स्थायी संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा कैसे बनाया जाएगा।

आगे क्या होगा?

केंद्र सरकार के आगामी हलफनामे में इन विषयों की जानकारी दिए जाने की संभावना है:

  • राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का क्रियान्वयन;
  • नंदन नीलेकणी टास्क फोर्स के प्रस्ताव;
  • NTA में कर्मचारियों और वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियां;
  • सुरक्षित डेटा भंडारण और राष्ट्रीय परीक्षा डेटाबेस;
  • साइबर सुरक्षा और गोपनीय संचालन से संबंधित बुनियादी ढांचा;
  • अनुसंधान एवं विकास क्षमता;
  • परीक्षा केंद्र और केंद्रीय नेटवर्क संचालन; और
  • NEET-UG को कंप्यूटर आधारित परीक्षा में बदलने की व्यावहारिकता।

अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट सुधारों के लिए कोई समयसीमा निर्धारित करेगा या सरकार और विशेषज्ञ समितियों को उनके क्रियान्वयन का तरीका और समय तय करने देगा।

फिलहाल न्यायालय ने न तो NTA को बदलने का अंतिम आदेश दिया है और न ही NEET-UG को कंप्यूटर आधारित परीक्षा बनाने का निर्णय सुनाया है।

यह रिपोर्ट Bar & Bench द्वारा सबसे पहले प्रकाशित अदालती कार्यवाही, आधिकारिक न्यायिक दस्तावेजों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्वतंत्र रूप से लिखी गई है।

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